KhatuShyamji News: 3 करोड़ श्रद्धालु, फिर भी बदहाल व्यवस्थाएं! क्या बनेगा खाटूश्यामजी समेत बड़े तीर्थों के लिए अलग प्राधिकरण?

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देश-दुनिया से उमड़ रही आस्था की भीड़, लेकिन खाटूश्यामजी की व्यवस्था पर बड़ा सवाल; क्या अब बनेगा अलग धार्मिक विकास प्राधिकरण? खाटूश्यामजी: (रिपोर्ट- सुजल स्वामी) राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर हर साल करोड़ों श्रद्धालुओं की आमद हो रही है, लेकिन इन तीर्थस्थलों की व्यवस्थाएं आज भी सीमित संसाधनों वाले ग्राम पंचायतों और नगर निकायों के भरोसे चल रही हैं। श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के कारण यातायात, सफाई, पार्किंग, पेयजल और मूलभूत सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों ने इन बड़े धार्मिक स्थलों के लिए अलग धार्मिक स्थल विकास प्राधिकरण बनाने की आवश्यकता बताई है। खाटूश्यामजी सबसे अधिक दबाव वाले धार्मिक स्थलों में शामिल विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी में हर वर्ष करीब ढाई करोड़ से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि कस्बे की स्थानीय आबादी करीब 30 हजार है। श्रद्धालुओं की इस विशाल संख्या के मुकाबले नगर पालिका के पास सीमित संसाधन हैं। होटल, धर्मशालाओं और व्यापारिक गतिविधियों से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं, लेकिन स्थानीय निकायों की आय और संसाधन उसी अनुपात म...

November-December 2026 Vivah Muhurat: चार महीने तक नहीं होंगे शुभ कार्य, जानें नवंबर-दिसंबर में कब हैं विवाह मुहूर्त

 

चार महीने तक नहीं बजेंगी शहनाइयां, 11 जुलाई आखिरी विवाह मुहूर्त; जानें नवंबर-दिसंबर में कब हैं शुभ तिथियां



खाटूश्यामजी। विवाह का इंतजार कर रहे लाखों परिवारों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। इस विवाह सीजन की अंतिम शहनाई 11 जुलाई को बजेगी। इसके बाद करीब चार महीने तक विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। चातुर्मास, गुरु एवं शुक्र तारा अस्त, श्राद्ध पक्ष और खरमास जैसे धार्मिक एवं ज्योतिषीय कारणों के चलते विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और देव प्रतिष्ठा जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाएंगे।

हालांकि इस दौरान 22 जुलाई को भड़ली नवमी का अबूझ मुहूर्त रहेगा, जिसमें बिना पंचांग देखे परंपरागत रूप से विवाह संपन्न कराए जा सकते हैं।

इन कारणों से चार महीने तक नहीं होंगे शुभ कार्य

गुरु तारा अस्त

16 जुलाई को गुरु तारा पश्चिम दिशा में अस्त होगा और 9 अगस्त को पूर्व दिशा में उदय होगा। परंपरा के अनुसार गुरु तारे के अस्त होने से तीन दिन पहले तथा उदय होने के तीन दिन बाद तक सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।

हरिशयन (देवशयन) काल

25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाएंगे। यह अवधि 20 नवंबर तक रहेगी। इस दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में विवाह मुहूर्त नहीं होते।

श्राद्ध पक्ष

26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक महालय श्राद्ध पक्ष रहेगा। पितरों को समर्पित इस अवधि में विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों की मनाही रहती है।

शुक्र तारा अस्त

14 अक्टूबर को शुक्र तारा अस्त होगा और 28 अक्टूबर को उदय होगा। शुक्र के अस्त होने से तीन दिन पहले और उदय होने के तीन दिन बाद तक भी विवाह नहीं किए जाते।

खरमास

खरमास के दौरान भी सनातन परंपरा में विवाह और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।

नवंबर में फिर गूंजेंगी शहनाइयां

पं. योगेश शर्मा (धरड़) ने बताया कि पंचांग के अनुसार 11 जुलाई इस सीजन का अंतिम विवाह मुहूर्त है। इसके बाद चातुर्मास सहित विभिन्न धार्मिक और ज्योतिषीय कारणों से विवाह नहीं होंगे। अब शुभ विवाह मुहूर्त सीधे नवंबर के उत्तरार्ध से प्रारंभ होंगे।

नवंबर 2026 के विवाह मुहूर्त

  • 21 नवंबर
  • 24 नवंबर
  • 25 नवंबर
  • 26 नवंबर

दिसंबर 2026 के विवाह मुहूर्त

  • 2 दिसंबर
  • 3 दिसंबर
  • 11 दिसंबर
  • 12 दिसंबर

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विवाह जैसे शुभ संस्कार शुभ मुहूर्त में संपन्न करने से दांपत्य जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल की प्राप्ति होती है। इसलिए अधिकांश परिवार इन निर्धारित तिथियों का ही इंतजार करते हैं।

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