KhatuShyamji News: 3 करोड़ श्रद्धालु, फिर भी बदहाल व्यवस्थाएं! क्या बनेगा खाटूश्यामजी समेत बड़े तीर्थों के लिए अलग प्राधिकरण?
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खाटूश्यामजी। विवाह का इंतजार कर रहे लाखों परिवारों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। इस विवाह सीजन की अंतिम शहनाई 11 जुलाई को बजेगी। इसके बाद करीब चार महीने तक विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। चातुर्मास, गुरु एवं शुक्र तारा अस्त, श्राद्ध पक्ष और खरमास जैसे धार्मिक एवं ज्योतिषीय कारणों के चलते विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और देव प्रतिष्ठा जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाएंगे।
हालांकि इस दौरान 22 जुलाई को भड़ली नवमी का अबूझ मुहूर्त रहेगा, जिसमें बिना पंचांग देखे परंपरागत रूप से विवाह संपन्न कराए जा सकते हैं।
16 जुलाई को गुरु तारा पश्चिम दिशा में अस्त होगा और 9 अगस्त को पूर्व दिशा में उदय होगा। परंपरा के अनुसार गुरु तारे के अस्त होने से तीन दिन पहले तथा उदय होने के तीन दिन बाद तक सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाएंगे। यह अवधि 20 नवंबर तक रहेगी। इस दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में विवाह मुहूर्त नहीं होते।
26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक महालय श्राद्ध पक्ष रहेगा। पितरों को समर्पित इस अवधि में विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों की मनाही रहती है।
14 अक्टूबर को शुक्र तारा अस्त होगा और 28 अक्टूबर को उदय होगा। शुक्र के अस्त होने से तीन दिन पहले और उदय होने के तीन दिन बाद तक भी विवाह नहीं किए जाते।
खरमास के दौरान भी सनातन परंपरा में विवाह और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
पं. योगेश शर्मा (धरड़) ने बताया कि पंचांग के अनुसार 11 जुलाई इस सीजन का अंतिम विवाह मुहूर्त है। इसके बाद चातुर्मास सहित विभिन्न धार्मिक और ज्योतिषीय कारणों से विवाह नहीं होंगे। अब शुभ विवाह मुहूर्त सीधे नवंबर के उत्तरार्ध से प्रारंभ होंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विवाह जैसे शुभ संस्कार शुभ मुहूर्त में संपन्न करने से दांपत्य जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल की प्राप्ति होती है। इसलिए अधिकांश परिवार इन निर्धारित तिथियों का ही इंतजार करते हैं।
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